Hathi Kheda Mandir, Lawjara, Jharkhand and the Mystery Attached in Hindi

हाथी भगदड़ झारखंड के गांवों में बहुत आम बात है। कहा जाता है कि झारखंड के गांवों में और उसके आसपास, हाथियों ने हजारों से अधिक लोगों की जान ले ली, कई घरों और फसलों को नष्ट कर दिया। लेकिन इन सभी गांवों के बीच, सिंहभूम जिले के जंगल में स्थित लोजोरा नमक ग्राम के ग्रामीणों के साथ हाथियों का कुछ विशेष स्नेह है। ऐसा कहा जाता है कि आज तक इस गाँव में हाथियों के भगदड़ की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है। यह एक प्रकार का चमत्कार है, कि जब आसपास के अन्य गाँव, हाथियों के भगदड़ के इतने मामलों के गवाह बने हैं, तो लोजोरा कैसे इनके हमलो से बचा हुआ हैं। जी हाँ और इसीलिए लाजोरा गांव के पीछे का रहस्य जानने के लिए हर कोई उत्सुक है।

हाथी खेड़ा मंदिर का रहस्य

लोजोरा गाँव दलमा वन्यजीव अभयारण्य (Dalma Wildlife Sanctuary) में स्थित है और पूरे साल जंगली हाथियों से घिरा रहता है। कहा जाता है कि सैकड़ों साल पहले हाथी गाँव में कहर मचाते थे। इसे समाप्त करने के लिए, एक संत ने एक मिट्टी की मूर्ति स्थापित की और यहां हाथी की पूजा का अनुष्ठान शुरू किया और यह माना जाता है कि तब से हाथियों का उतपात लोजोरा में बंद हो गया। बाद में एक मंदिर का निर्माण किया गया और इसे “हाथी खेड़ा मंदिर” नाम दिया गया। इसलिए, जब भी जंगली हाथियों ने लोजोरा पर हमला किया, ग्रामीणों ने मंदिर में हाथी खेड़ा बाबा का आह्वान करना शुरू कर दिया और हाथी चले गए। झारखंड राज्य में “हाथी खेड़ा मंदिर” में किसी भगवान की मूर्तियाँ नहीं हैं, बल्कि हाथी की मूर्तियाँ हैं।

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यह मंदिर झारखंड के लोगों के लिए एक बहुत प्रसिद्ध पूजा स्थल है। यह एक सुंदर मंदिर है जहाँ आप वास्तव में प्रकृति को महसूस कर सकते हैं और गाँव के वातावरण का अनुभव कर सकते हैं। आप मंदिर के बाहर से ताजी सब्जियां भी खरीद सकते हैं। मेरे जैसे लोगों के लिए जो गाँव के जीवन का अनुभव करना पसंद करते हैं, एक दिन बिताने के लिए यह एक आदर्श स्थान है। यह प्रकृति और आध्यात्मिकता का एक पूरा पैकेज है। सर्दियों में, यह जमशेदपुर और उसके आसपास रहने वालो के लिए एक आदर्श पिकनिक स्थान है। जंगलो में पिकनिक मानाने का अलग ही मज़ा है। आप यहाँ खाना भी बना सकते हैं।

मंदिर गाँव में स्थित है और इसलिए यहाँ आपको कोई आधुनिक सुविधाएँ नहीं मिल सकती, इसलिए, अपने साथ पानी की बोतलें, भोजन, दवाइयाँ आदि ले जाना उचित है। यदि आप भाग्यशाली हैं, तो आपको जंगली हाथियों की प्रशंसा करने का मौका मिल सकता है।

नोट: महिला श्रद्धालुओं को प्रसाद के संबंध में कुछ प्रतिबंध हैं, इसलिए मंदिर के अधिकारियों से बात करना उचित होगा।

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कैसे पहुंचे हाथी खेड़ा मंदिर ?

जमशेदपुर हाथी खेड़ा मंदिर की सड़क मार्ग से विभिन्न स्थानों से दूरी

जमशेदपुर 40.5 किमी,

पुरुलिया 46.2 किमी,

रांची 144.1 किमी,

कोलकाता 299.3 किमी

अगर आप जमशेदपुर या पुरुलिया से यात्रा कर रहे हैं तो आप कार या बाइक जैसे अपने परिवहन के साधनों से जा सकते हैं। लेकिन दूसरों के लिए मैं पहले जमशेदपुर आने की सलाह दूंगी फिर आप कार किराए पर लेकर उस जगह पर जा सकते हैं।

Hathi Kheda Mandir, Lawjara, Jharkhand and the Mystery Attached in English

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